नए ई-कॉमर्स ड्राफ्ट नियम: टाटा, अडानी के सुपरऐप प्लान को लग सकता है झटका, ये है वजह

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मुंबई

ई-कॉमर्स से जुड़े ड्राफ्ट कंज्यूमर नियम लागू होते हैं तो भारतीय समूहों का ई-कॉमर्स गेम काफी प्रभावित होगा। विशेष रूप से ऐप्स का डेवलपमेंट। इसकी वजह है कि नए कंज्यूमर नियम संबंधित पक्षों को उनके बाजार-आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने से रोकते हैं। इन प्रस्तावों से टाटा समूह के सुपर ऐप के काम में रुकावट आई है। सुपरऐप एक ऑल-इन-वन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसका कर्मचारियों सहित प्रमुख हितधारकों पर परीक्षण किया जा रहा है।

अडानी एंटरप्राइजेज भी एक सुपर ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। सुपर ऐप एक ही प्लेटफॉर्म पर एक समूह के सभी उत्पादों और सेवाओं को ला सकता है। इससे यूजर्स को एक ही स्थान से किराने और दवा की डिलीवरी, फ्लाइट और होटल के कमरे की बुकिंग, और निवेश विकल्पों का उपयोग करने की अनुमति मिलती है।

क्या कहता है कंपनी अधिनियम

कंपनी अधिनियम एक संबंधित पार्टी को एक निकाय कॉर्पोरेट के रूप में परिभाषित करता है जो इस तरह के निकाय की होल्डिंग, सहायक या सहयोगी है और शेयरधारकों व निदेशकों की एक आम श्रृंखला है। प्रस्तावित नियमों के तहत टाटा समूह की कंपनियां जैसे टाइटन, ट्रेंट, टाटा मोटर्स और ताज इसके सुपरऐप का हिस्सा नहीं हो सकतीं। अडानी समूह की कंपनियों के लिए भी ऐसा ही है।

रिलायंस ने नियमों का किया समर्थन

टाटा ने औपचारिक रूप से उपभोक्ता मंत्रालय को चिंताओं से अवगत कराया है, जबकि रिलायंस ने बताया है कि वह ड्राफ्ट नियमों का समर्थन करती है। पिछले हफ्ते, उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने ड्राफ्ट नियमों पर आपत्ति जताने और ब्रिक व मोर्टार व्यवसायों की रक्षा में शामिल राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने के लिए टाटा की आलोचना की थी।

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