हेयर मास्क या हेयर लेप, मानसून में बालों की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए क्या है बेहतर? जानें यहां

हेयर मास्क या हेयर लेप, मानसून में बालों की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए क्या है बेहतर? जानें यहां © जागरण द्वारा प्रदत्त हेयर मास्क या हेयर लेप, मानसून में बालों की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए क्या है बेहतर? जानें यहां

अगर कई ब्यूटी व हेयर केयर विशेषज्ञों के अनुमानों पर यकीन किया जाए तो मॉनसून के दौरान अधिकतर लोगों में बालों के झड़ने की समस्या करीब 30% बढ़ जाती है। मॉनूसन के दौरान बालों के अधिक झड़ने की मुख्य वजहों में पर्यावरण में नमी का बढ़ना है जिससे बाल हाइड्रोजन सोखते हैं और फूल जाते हैं। इस वजह से कमज़ोर और फ्रि​ज़ी बाल आसानी से टूट जाते हैं। मॉनसून के दौरान सिर की त्वचा में प्राकृतिक तेलों की कमी हो जाती है जबकि नमी हेयर फॉलिकल की मज़बूती को कमज़ोर करती है। लेकिन शुक्र है कि मॉनसून के दौरान भी हमारे बालों व सिर की त्वचा के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए हमारे पास चुनने के लिए अब कई विकल्प उपलब्ध हैं जिनमें से सबसे लोकप्रिय सॉल्यूशंस हैं हेयर मास्क और हेयर लेप।

हेयर मास्क या हेयर लेप क्या है बेहतर?

सबसे ज़रूरी सवाल है कि मॉनसून के दौरान बालों के झड़ने की समस्या से निपटने के लिए हेयर मास्क का इस्तेमाल किया जाए या हेयर लेप का। दिल्ली स्थित हर्बल व ऑर्गेनिक सेल्फ केयर ब्रांड लव अर्थ की संस्थापक परिधि गोयल के अनुसार, इस्तेमाल में आसान होने के कारण हेयर लेप की तुलना में हेयर मास्क बेहतर विकल्प हैं। वह बताती हैं, “हेयर लेप आमतौर पर सिर की त्वचा के लिए इस्तेमाल होते हैं जबकि हेयर मास्क अधिकतर बालों पर लगाए जाते हैं। हेयर लेप पाउडर के रूप में उपलब्ध हैं जबकि हेयर मास्क इस्तेमाल में आसान होते हैं। अगर आप मुझसे पूछे तो मैं हमेशा हेयर मास्क को प्राथमिकता दूंगी क्योंकि इन्हें इस्तेमाल करना बहुत आसान होता है। हेयर लेप का उचित घनत्व हासिल करने में बहुत समय लगता है और इसे लगाने में भी मदद की आवश्यकता होती है। हेयर लेप का प्रभाव बहुत अधिक समय तक नहीं रहता है जबकि हेयर मास्क का उपयोग प्रत्येक 15 दिन में किया जा सकता है और आपको इसका प्रभाव भी तुरंत देखने को मिलता है।”

हेयर लेप और हेयर मास्क में समस्याएं

परिधि आगे बताती हैं कि लेप का असर दिखने में थोड़ा अधिक समय लगता है जबकि मास्क का असर तुरंत दिखता है और मॉनसून की समस्या से निपटने के लिए इसकी ज़रूरत है। बकौल परिधि, ''लेप इस्तेमाल करने के परिणाम धीरे-धीरे समय के साथ दिखते हैं। ऐसा भी होता है कि लेप इस्तेमाल करने के बाद आपके बाल उसके तत्वों की वजह से रूखे हो जाएं। इसके साथ ही पाउडर के तौर पर उपलब्ध होने के कारण लेप में मिलावट की आशंका बनी रहती है जबकि मास्क अधिकतर रेडी-टू-यूज़ होते हैं। और आखिर में मास्क सिर को एक बार धोने से ही निकल आता है जबकि बालों से लेप निकालने के लिए कई बार सिर धोना पड़ता है और बालों में लेप की गांठ भी बन सकती है।’'

हालांकि, भारत में प्रीमियम बेबी एवं मदर केयर ब्रांड मदर स्पर्श के सह-संस्थापक डॉ. हिमांशु गांधी इस विचार से सहमति नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि मास्क से बालों को बाहरी चमक मिलती है जबकि बेहतरीन आयुर्वेदिक फॉर्मूला के कारण लेप मॉनसून के कारण आई नमी से लड़कर बालों को भीतर से मज़बूत बनाते हैं। डॉ. गांधी आगे कहते हैं कि हेयर मास्क की तुलना में हेयर लेप का संयोजन काफी विविध होता है जिसे दही या पानी मिलाकर और बेहतर बनाया जा सकता है।

पिछले 25 वर्षों से ब्यूटी, स्किन व हेयर केयर एक्स्पर्ट रहीं रेणु सरकार के अनुसार, बालों की देखभाल के लिए प्राकृतिक सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ना कि ऐसे उत्पादों को जिनमें रसायनों का उपयोग हो। उनका मानना है, ''हेयर मास्क और हेयर लेप के बीच मुख्य अंतर है कि लेप का इस्तेमाल बालों की जड़ों पर किया जाता है जबकि मास्क को बालों की लंबाई पर लगाया जाता है। इसकी वजह है कि लेप में जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक तत्व होते हैं जो सिर की त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते। आमतौर पर हेयर मास्क में ऐसे तत्व होते हैं जो बालों की जड़ों को कमज़ोर कर सकते हैं और इसलिए इन्हें बहुत ध्यान से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। आप चाहें मास्क चुनें या लेप लेकिन यह सुनिश्चित करें कि उसमें किसी प्रकार का हानिकारक रसायन या टॉक्सिन मौजूद नहीं हो।''

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